• Location
  • Dilip Nagar, Daman, Daman and Diu 396210

About us

Welcome to Umesh Babubhai Patel

Personal Details

  • नाम : उमेशभाई बाबूभाई पटेल (40) विवाहित

  • पिताजी : बाबूभाई कुंवरजी पटेल

  • माताजी : लक्ष्मीबेन बाबूभाई पटेल

  • भाई : स्वर्गीय पंकजभाई पटेल (विवाहित)

  • बहन : सुधाबेन सुरेशभाई पटेल (विवाहित)

  • उमेश पटेल : 2 संतान

  • पत्नी : श्वेताबेन उमेश पटेल

  • पुत्र : क्रिष उमेश पटेल (6)

  • पुत्री : देव्यांशी उमेश पटेल

  • शिक्षा : बी.कॉम

उमेश पटेल बाल्यकाल से ही दयालु एवं सेवाभावी स्वभाव के रहे है। उनके पिताजी ने उन्हें बहुत ही गरीबी में पाला पोसा है। इस गरीबी की वजह से ही उमेशभाई पटेल को कष्टदायी जीवन जीने की आदत पड़ गई है। गरीबी की वजह से बचपन में उनके वैभवी ठाठ-बाठ वैसे नहीं थे जैसे कि दमण-दीव के अन्य अमीर घराने के युवाओं के थे। जब वे छोटे थे तो पुराने कपड़े और पुराने नोटबुक से ही काम चलाते थे। बचपन में उमेशभाई के पिताजी उन्हें सुबह 5 बजे उठाकर अपने पालतू गाय बैलो को खेत खलिहान में छोड़ने को भेजा करते थे। खेत खलिहान से घर पहुंचते पहुंचते उनका स्कूल जाने का वक्त हो जाता था इसके बाद वे दलवाडा से भीमपोर यानि लगभग 5 कि.मी. तक पैदल चलकर स्कूल जाते थे। घर से स्कूल, स्कूल से घर... ये क्रम उनका रोज चलता था। स्कूल से आने के बाद वे खाना खाते-खाते ही जानवरों को चारा-पानी दिया करते थे। ये क्रम कक्षा 7वीं तक चलता रहा। इसी वर्ष उमेशभाई ने वेल्डिंग के वर्कशोप में पार्ट टाईम जॉब शुरु कर दिया। उसकी वजह यह थी कि इतने बडे परिवार का बोझ उनके पिताजी अब वहन नहीं कर पा रहे थे। इसके बाद उमेश पटेल नित्य यही कर्म करते थे। पहले खेत-खलिहान, फिर स्कूल, फिर पार्टटाईम जॉब... ये क्रम 4-5 साल चलता रहा। इस तरह उमेशभाई 12वीं कक्षा तक पहुंचे। इसी बीच वे 12वीं कक्षा में फेल हो गये। 12वीं में फेल होते ही उन्होंने एक फैक्ट्री में फूल टाईम नौकरी कर ली। इन्ही दिनों उमेशभाई ने अपने बचे खुचे हुए समय में स्वाध्यायी छात्र के रूप में बी.कॉम की पढ़ाई पूरी की। नौकरी करते करते वे लोगों की सेवा भी करते थे। मगर अपने सेवाभावी स्वभाव और लोगों की सहायता करने की आदत से उन्हें बार बार छुट्टियां लेनी पडती थी। जिसके चलते उन्हें कंपनी में डांट पड़ती थी। लेकिन उमेश पटेल का जैसा स्वभाव था उस हिसाब से उन्हें डांट फटकार अच्छी नहीं लगती थी। इसके बाद उन्होंने नौकरी छोड़कर खुद का धंधा करने का विचार किया। इस विचार को उन्होंने जल्द ही हकीकत में बदलकर कडैया इंडस्ट्रीयल एरिया में चाय नाश्ते की दुकान लगा ली। ये काम उन्होंने लगभग 5 वर्ष किया। कंपनियों के कर्मचारियों को चाय पिलाने के दौरान उनके मैनेजरों के साथ अच्छे संबंद्ध विकसित हुए। इसी बीच पोलीकैब वायर के मैनेजर स्व. जैकब ने उन्हे NGO बनाने की सलाह दी और लेबर कांट्रेक्टर बनने के लिए कहा। उमेश पटेल ने जैकब साहब के कहने पर कंपनी में लेबर कांट्रेक्ट शुरु कर दिया। पहला लेबर कांट्रेक्ट जैकब साहब ने ही उन्हें दिया। इसके बाद उमेश पटेल फुलटाईम समाज सेवा में जुट गए। इसी बीच नेहरू युवा केंद्र दमण ने उनके पैत्रिक ग्राम दलवाडा में 12 जनवरी 2000 को विवेकानंद जयंती मनाने का फैसला किया। नेहरू युवा केंद्र ने दलवाडा के जागरूक युवाओं को इकठ्ठा किया और कार्यक्रम का आयोजन करने का विचार किया। यूं तो उस समय भी दलवाडा के कई युवा पढे लिखे थे पर माइक के सामने आते ही उनकी घिग्गी बंध जाती थी। ऐसे में माइक संचालक की जिम्मेदारी नेहरू युवा केंद्र ने उमेश पटेल को दी। परंतु उस समय उमेश पटेल को स्वामी विवेकानंद के विषय में कोई खास ज्ञान नहीं था। इसकी जानकारी मिलते ही नेहरू युवा केंद्र ने दो दिन पहले ही उमेश पटेल को स्वामी विवेकानंद की किताब थमाई और उनसे कहा गया कि इसी किताब को पढकर बोलना है। उमेश पटेल के जीवन का यही टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ। स्वामी विवेकानंद की किताब पढकर उन्होंने कार्यक्रम का संचालन किया। इसके बाद उन्होंने स्वामी विवेकानंद की पूरी किताब पढ डाली। जिससे उनके जीवन में भारी परिवर्तन आ गया। इसके बाद इसी हफ्ते उन्होंने स्वामी विवेकानंद युवक मंडल का गठन किया। जिसके वे अध्यक्ष बने। संस्था बनते ही उमेश पटेल ने समाज के विभिन्न क्षेत्रो में सामाजिक कार्य पुरजोर तरीके से शुरु कर दिये। वे जगह जगह रक्तदान शिविर का आयोजन करते थे, सरकारी स्कूलों में शिक्षक दिवस, स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस का आयोजन करते थे। इसी बीच हिन्दी भाषी बच्चों की गुजराती स्कूल में पढाई के दौरान हो रही तकलीफो को देखकर उन्होंने हिन्दी स्कूल खोलने का विचार किया। यह विचार उन्होंने अपने दोस्तो को बताया, उनके विचार संगठन के मित्रों को योग्य और उत्तम लगे। उन्होंने कहा कि इस समय अंग्रेजी माध्यम का भी चलन है। उमेश पटेल ने मित्रों के विचार को विनम्र भाव से स्वीकार किया। इसके बाद पहले साल जमीन की खरीदी की गई, स्कूल चलाने के लिए जरूरी सरकारी कागजात तैयार कराये गये। पहले 2 साल में नर्सरी से 7वीं कक्षा तक स्कूल में पढाई शुरु हुई और आज वह स्कूल 10वीं कक्षा तक पहुंच चुका है। इस स्कूल में 99.99 प्रतिशत गरीब हिन्दी भाषी तबके के लोग पढते है। इस स्कूल का रिजल्ट काबिले तारीफ है पिछले 3 साल से स्कूल का SSC का परिणाम क्रमशः 93 प्रतिशत, 97 प्रतिशत और 100 प्रतिशत रहा। अब समाज में उमेश पटेल का कद बढने लगा। लोग उनके पास अपनी समस्या लेकर आने लगे। लोगो की समस्या के समाधान को हल करने के लिए उमेश पटेल राजकीय लोगो की सहायता लेते और उनकी मदद से लोगों की समस्याओं का समाधान करने लगे। इसके बाद वे धीरे धीरे सरकारी कार्यालयो में जाकर लोगों की समस्याओं के लिए सरकारी अधिकारियों से लड़ने लगे। उनके प्रयासों से लोगों की समस्याओ का निदान होने लगा और लोगों को अच्छे परिणाम भी दिखने लगे। जिसके चलते उमेश पटेल के प्रति लोगों की आशा और अपेक्षा बढ़ने लगी। उमेशभाई की बढ़ती हुई लोकप्रियता अब विरोधियों को खटकने लगी। इसके बाद वे उमेश पटेल को रोकने के लिए उनके कार्यों में अडंगे लगाने लगे। अब उमेश पटेल को समझ में आने लगा कि राजनीतिक लोग उनके काम में अडंगे लगाने लगे है तो उन्होंने संस्था की शक्ति बढ़ाने और ज्यादा से ज्यादा लोगों को इसमें जोड़ने का संकल्प लिया। जिसके चलते उमेशभाई ने हर गांव, हर शेरी में घूम घूमकर पढे लिखे युवाओं को अपने साथ जोडने की शुरुआत की। देखते ही देखते कई गांवो में विभिन्न समाजों के युवक-युवतियां उनके साथ जुड़ गये।

उमेश पटेल ने इसके बाद 60 NGO औऱ महिलाओं के 100 स्व सहायता समूह खड़े कर दिये। फिर उमेश पटेल ने 2001 में युथ एक्शन फोर्स दमण का गठन किया। 2002 में दीव के युवाओं को जोड़कर उन्होंने यूथ एक्शन फोर्स दमण-दीव बनाया। इस संगठन के गठन के बाद उमेश पटेल और मजबूत हो गये। इसी बिच २००२ में शहीद भगतसिंह पर चार फिल्मे आयी इन्हे देखकर उमेश पटेल भगतसिंह के चरित्र से प्रभावित हुए । अब वे पहले से ज्यादा आक्रामक रजुआत करने लगे जिससे दमण-दीव के राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलने लगे। अब उमेश पटेल दमण-दीव की आवाज और युवाओ की जान बन चुके थे। वे अब युवाओं का ब्रांड कहलाने लगे थे। इसी बीच कोली पटेल समाज के पढे लिखे युवाओं ने उन्हें कोली पटेल समाज को OBC में लाने की बात याद दिलायी। इसके बाद उमेश पटेल ने तत्कालीन मामलतदार जी.एम.डाली के मार्गदर्शन में कोली पटेल समाज को OBC में लाने के तमाम दस्तावेज एकत्रित किये और उच्च अधिकारियों के सामने इसकी फरियाद की। 2002-03 में उमेश पटेल के अथक प्रयासों से कोली पटेल समाज को OBC में शामिल कर लिया गया। कोली पटेल समाज का पहला OBC सर्टिफिकेट उनके चचेरे भाई अरविंद भुलाभाई पटेल को दिया गया। OBC का दर्जा मिलते ही इसकी खबर अखबारों में भी छपी। उमेश पटेल की समाज में बढती हुई प्रसिद्धी को देखते हुए तत्कालीन सांसद ने कोली पटेल समाज को OBC में शामिल करने का विरोध किया था और इस घटना को अन्य समाज के साथ अन्याय निरूपित भी किया। इसके बाद उमेशभाई पटेल ने कोली पटेल, माछी, राणा, खारवा समेत अन्य (27) जातियो को भी OBC में लाने की प्रशासन से मांग की।

जिसके चलते 31-1-2003 को प्रशासन ने एक नोटिफिकेशन जारी कर उपरोक्त सभी जातियों को भी OBC में शामिल कर लिया। अब उमेश पटेल का कद आसमान छू रहा था। अब सारे युवा अपनी अपनी समस्यायों लेकर उमेश पटेल के पास पहुंचने लगे। उसी समय दमण-दीव सरकारी पुलिस की भर्ती के विज्ञापन में खुला साक्षात्कार रखा गया। इस बात को लेकर युथ एक्शन फोर्स के ऑफिस में युवाओं ने बैठक भी बुलाई। इस बैठक में दमण-दीव के युवाओं को ही नौकरी मिले ऐसा युवाओं ने ठहराव किया। इसके बाद उमेश पटेल के नेतृत्व में सभी युवा प्रशासक से मिले और उनसे यह मांग की। परंतु तत्कालीन प्रशासक ने उनकी मांग को नजर अंदाज कर दिया। इसके बाद उमेश पटेल ने पहली बार दमण बंद करने का एलान किया। जिसमें दमण के सभी समाजों के लोगों ने भरपूर सहयोग दिया। इस आंदोलन को लोगों का भारी समर्थन मिला। इस दबाव के चलते दमण-दीव पुलिस भर्ती में ज्यादातर भर्तीयां स्थानीय लोगों को ही मिली। इसके पश्चात प्रशासन ने शिक्षको की भर्ती खुले साक्षात्कार से करने का फैसला किया। ये विज्ञापन जैसे ही निकला वैसे ही उमेश पटेल ने इसका पुरजोर विरोध कर उग्र आंदोलन चलाया। उन्होंने दमण को बंद करवाकर सारी गाडियों को शहर में आने से रोक दिया या यूं कहिए बाहरी उम्मीदवारो को परीक्षा स्थल तक पहुंचने ही नहीं दिया। जिसकी वजह से स्थानीय लोगो को शिक्षकों की नौकरी मिल गई। अब उमेश पटेल रातों रात दमण के स्टार बन गये। इसके बाद प्रशासन ने LDC की भर्ती के लिए खुला साक्षात्कार करने का विज्ञापन निकाला। इस विज्ञापन के ओपन होते ही उमेश पटेल को लगने लगा कि अपने हक के लिए हर बार उन्हें आंदोलन करना पड रहा है। ऐसे में स्थाई समस्या का समाधान करने के लिए उन्होंने प्रशासक ऑफिस के सामने भूख हड़ताल की। यह भूख हडताल 11वे दिन तक चलती रही। इसके बाद उमेश पटेल के इस भूख हडताल के समक्ष प्रशासन ने हथियार डाल दिये। इसके बाद प्रशासन ने उमेश पटेल को मीटिंग के लिए बुलाया। इस मीटिंग में निश्चित हुआ कि अगली जो भर्ती होगी उसमें डोमिसाइल लोगों को ही लिया जाएगा। इस तरह दमण-दीव के स्थानीय लोगो को डोमिसाइल का अधिकार मिला। इस LDC भर्ती में 85 प्रतिशत स्थानीय लोगों को नौकरी मिली। जब बात आंदोलन की चल रही हो तो 2003 का काला दिन कैसे भूलाया जा सकता है। उस दिन दमणगंगा ब्रिज के गिरने से 28 स्कूली बच्चों समेत 32 लोगों की मृत्यु हो गई थी। ब्रिज गिरने का जवाबदेह प्रशासन था। उमेश पटेल ने प्रशासन के लापरवाह जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्यवाही करने के लिए आवाज उठायी और खुर्शीद मांजरा के सहयोग से दोषी अधिकारियों को सजा दिलाने के लिए आंदोलन किया। उस समय के तत्कालीन प्रशासक ने उमेश पटेल एवं खुर्शीद मांजरा सहित कई निर्दोष युवाओ पर झूठी FIR दर्ज कराकर लोगो की आवाज दबाने का प्रयास किया । ये केस लगभग 14 साल तक चला। अभी हाल ही में 2017 में इस मामले में सभी लोग बाइज्जत बरी हो गये।

इसी तरह 2004-05 में दमण-दीव के विद्युत विभाग को प्रशासन ने रिलायंस को बेचने का षडयंत्र रचना शुरू कर दिया। उमेश पटेल को इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने दमण-दीव के विद्युत विभाग को निजी हाथों में जाने से रोकने के प्रयास शुरू कर दिये। इस प्रयास में सभी पार्टी के नेताओं, सभी समाज के अग्रणीयों और औद्योगिक इकाईयों के अध्यक्षों ने उमेश पटेल का समर्थन किया। इतने बडे-बडे लोगों के बीच में इस आंदोलन का नेतृत्व करने का अवसर उमेश पटेल को मिला। यह बहुत बडी बात थी। इसके बाद उमेश पटेल ने विद्युत विभाग को निजी हाथों में जाने से बचाने का आंदोलन शुरु किया। उस दौरान उन्होंने गांव गांव - शेरी शेरी जाकर 168 बैठक लेकर लोगो को जागृत किया। इस आंदोलन में उमेश पटेल को भारी समर्थन मिलता देखकर विरोधियो ने उनकी गाडी तोडकर उन पर हमला कर दिया। जिसकी वजह से उन्हें हल्की चोटें आई। दरअसल उनके विरोधियों ने हमला करके उन्हें डराने की कोशिश की थी। लेकिन उमेश पटेल झुके नहीं और उनके प्रयास से दमण-दीव ने एक ऐतिहासिक आंदोलन देखा । उनके नेतृत्व में 20-25 हजार जनता प्रशासक कार्यालय पहुंची। इतने भारी जनसमुदाय को देखकर प्रशासक को खुद अपने चैंबर से नीचे उतरकर आना पडा और उन्होंने लिखित में आदेश दिया। इस आदेश पत्र में विद्युत विभाग को निजी में हाथों नहीं देने की बात कही गई थी। इस तरह विद्युत विभाग निजी हाथों में जाने से बच गया। इस आंदोलन का पूरा श्रेय लोगो ने उमेश पटेल को दिया। हालांकि 2010-11 में तत्कालिन प्रशासक सत्य गोपाल, 2011-12 में प्रशासक नरेंद्र कुमार और वर्तमान प्रशासक प्रफुल पटेल ने 2016-17 में फिर से विद्युत विभाग का निजीकरण करने की कोशिश की थी। विद्युत विभाग को बचाने के लिए उमेश पटेल ने फिर से आंदोलन किया। इस आंदोलन के चलते ही आज विद्युत विभाग सही सलामत है। इसी तरह 2009-10 में प्रशासन ने व्हीकल टैक्स में भारी बढ़ोत्तरी की थी। प्रशासन ने डेढ से दो प्रतिशत व्हीकल टैक्स को बढाकर छह से आठ प्रतिशत कर दिया। जिसका उमेश पटेल ने भरपूर विरोध किया। इस विरोध के चलते ही रात के 12 बजे प्रशासक सत्यगोपाल को अपने आवास पर टैक्स घटाने का नोटिफिकेशन देने को मजबूर होना पडा और उन्होंने टैक्स घटा दिया। जिसका श्रेय उमेश पटेल को जाता है।

2011-12 सत्र के दौरान पोलीटेक्निक कॉलेज दमण में सिर्फ 4 कोर्स की 120 सीट थी। उन चारो कोर्सो में डबल सीट करने और दो नये कोर्स IT और क़ॉम्प्यूटर बढाने समेत 420 सीट करने का परिपत्र केंद्र सरकार ने तत्कालीन प्रशासक को दिया था। किंतु प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही के चलते यह परिपत्र 5 साल तक कचरा पेटी में पड़ा रहा। अब ये सीट लेप्स होनेवाली थी। लेप्स होने के लिए 10 दिन बाकी थे। तब इसकी जानकारी पोलीटेक्निक कॉलेज के कर्मचारी ने उमेश पटेल को दी। इसके बाद उमेश पटेल ने तत्कालीन DMC के अध्यक्ष जिग्नेश जोगी के साथ मिलकर प्रशासक नरेंद्र कुमार के साथ मुलाकात की और इन सीटो को बचाने की गुहार लगाई। प्रशासक नरेंद्र कुमार ने उनकी बात ध्यान से सुनी और उनके अनुरोध को मान लिया। आज वह पोलीटेक्निक कॉलेज की 120 सीट बढकर 420 सीटे हो गई है और यह सब उमेश पटेल के कुशल नेतृत्व की वजह से ही संभव हो पाया।

आपको याद होगा वर्ष 2015-16 में दमण जिला पंचायत में नया परिसीमन लाया जा रहा था। जिसके तहत मोटी दमण की चार सीट घटाई जा रही थी। भारत सरकार की चुनाव आयुक्त भल्ला मैडम ने इन सीटों को घटाने का मन बना लिया था। जिसकी वजह से मोटी दमण के लोगो के साथ अन्याय होने की संभावना थी। इसे देखते हुए उमेश पटेल ने आक्रामक आंदोलन शुरू किया। इस आक्रामकता को देखकर तत्कालीन प्रशासक आशीष कुंद्रा को पसीना छूट गया था। उमेश पटेल के भयंकर आंदोलन को देखकर दमण-दीव प्रशासन ने चुनाव आयोग के फैसले को पलटते हुए मोटी दमण की चारों सीटों को यथावत रखने का फैसला किया। किंतु इस मामले में केतन पटेल हाइकोर्ट में चले गये। हाइकोर्ट में कानूनी लडाई लडकर उमेश पटेल ने आखिरकार 4 सीटो को बचाकर लोगों को न्याय दिला ही दिया। इसी तरह नगर पालिका में परिसीमन हो रहा था। इस परिसीमन में भी माछी समाज के साथ अन्याय हो रहा था। इस बार उमेश पटेल ने माछी समाज के लोगों को इकठ्ठा किया और चुनाव आयुक्त भल्ला से मिलकर जोरदार रजुआत की। जिसकी वजह से माछी समाज को न्याय मिला। इस तरह उमेश पटेल माछी समाज को न्याय दिलाने में सफल रहे।

2011-12 में PWD और विद्युत विभाग में काम करनेवाले अस्थायी कर्मचारियों को निकालने की कोशिश की जा रही थी जिसके चलते 500 से 700 लोगो को बेरोजगार किया जा रहा था। उनके लिए उमेश पटेल ने आंदोलन किया और सभी लोगों को बेरोजगार होने से बचा लिया। इसके बाद 150 से ज्यादा लोग वर्कचार्ज में लगे कुछ फिक्स हुए और बाकी लोगो के लिए कोर्ट में अभी भी लडाई लडी जा रही है। जिसका फैसला इन लोगो के हक में आने की संभावना है।

2015-16 में MBBS की चार सीटों पर स्थानीय लोगो के बजाय बाहरी उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जा रही थी। इन सीटों के आवंटन के वक्त ही उमेश पटेल पहुंच गये। उन्होंने उस समय विकास आयुक्त एवं स्वास्थ्य सचिव संदीप कुमार के समक्ष विरोध जताया। संदीप कुमार ने उमेश पटेल की मांग नहीं मानी इस पर उमेश पटेल ने तुरंत ही स्वास्थ्य मंत्री श्रीपद नायक को फोन लगाकर इस अन्याय की जानकारी दी। उसी समय स्वास्थ्य मंत्री नायक ने फैक्स द्वारा दमण-दीव के स्थानीय उम्मीदवारो को ये सीटे दिलवा दी।

2015-16 में ही दमण के साइंस कॉलेज में जीओलोजी के कोर्स नहीं थे, इसके अलावा दमण के स्थानीय विद्याथीर्यों को दाखिला नहीं मिल रहा था। इस पर उमेश पटेल ने दक्षिण गुजरात यूनीवर्सिटी से बातचीत की और जीओलोजी का कोर्स यहां चालू करवाया। उनके प्रयासों से स्थानीय विद्याथीर्यों को कॉलेज में दाखिला भी मिलने लगा।

अभी हाल ही में प्रशासक प्रफुल पटेल द्वारा दमण के तटीय विस्तार पर स्थित स्थानीय गरीब लोगों के लारी गल्ले तुड़वा दिए और अतिक्रमण हटाने के नाम पर हजारो लोगों को बेरोजगार कर दिया। उमेश पटेल ने इस पर आपत्ति जताई और लारी गल्ले फिर से शुरु करवाये। 2004-05 और 2012-13 में भी लारी गल्ला वालों के स्टॉल हटाकर उन्हें बेरोजगार किया गया था। तब भी उमेश पटेल ने प्रशासन का विरोध कर स्टॉल बचाये थे।

2016-17 में इंजीनियरिंग कॉलेज को निजी हाथों में देने की बात सामने आई थी। तब भी उमेश पटेल की टीम ने प्रशासक आशीष कुंद्रा के निवास में जाकर विरोध जताया था और इंजीनियरिंग कॉलेज को सरकारी हाथों से चलाने की मांग की थी आज यही कॉलेज आपके सामने आ रहा है।

2015-16 के दौरान शिक्षको के पदों में बाहरी लोगो को भर्ती करने की कवायद दमण प्रशासन द्वारा की जा रही थी। जिस पर उमेश पटेल ने आक्रामक बैठक ली और जमकर विरोध किया। बैठक से घबराकर प्रशासन ने बिना लिखित परीक्षा के ही 128 शिक्षको को मेरिट के हिसाब से लिया। हालांकि इस भर्ती के खिलाफ कुछ मूर्ख कोर्ट भी गये जिसकी वजह से यह भर्ती अधर में लटक गई।

पिछले डेढ साल पहले प्रशासक प्रफुल पटेल ने दमण-दीव के युवाओं के साथ अन्याय करनेवाला सरकारी नौकरियों का भर्ती बोर्ड बनाया। इसकी जानकारी उमेश पटेल को मिली तो उन्होंने भर्ती बोर्ड का पुरजोर विरोध किया। क्योंकि वे जान चुके थे कि इस बोर्ड के जरिये स्थानीय लोगों को न्याय नहीं मिलेगा। इस विरोध के चलते प्रशासन ने लोगों को भडकाने के जुर्म में उमेश पटेल पर FIR दर्ज करा दी। जिसका केस अभी लंबित है। बोर्ड अब बन चुका है। इस बोर्ड के जरिए 90 प्रतिशत बाहरी लोगों को नौकरी भी मिल गई। उमेश पटेल की ये आशंका सच निकली।

अभी हाल ही में दमण-दीव प्रशासन मजदुर वर्ग के लिए स्थानीय लोगो द्वारा बनायीं गयी चाल और कमरों को अवैध्य घोषित कर तोड़ देना चाहता था । जिसके बाद उमेश पटेल ने सभाये आयोजित कर लोगो को जाग्रत किया और राजनेता एवं प्रशासन पर दबाव बनाकर चाल टूटने से बचायी ।

जिस प्रशासक के सामने सारे के सारे नेता नतमस्तक हो गये हैं, सारे तीसमारखां भूमिगत हो गये हैं। ऐसे पावरफुल प्रशासक के सामने उमेश पटेल नहीं झुके। जिसकी वजह से उमेश पटेल को काफी आर्थिक और मानसिक कठिनाईयों का सामना करना पड़ा। प्रशासन ने उमेश पटेल के खिलाफ 6-7 झूठे केस भी दायर कर रखे है। उनके स्वामी विवेकानंद विद्यालय को बंद करवाने के लिए भी प्रशासन ने काफी कोशिश की। उनके NGO पर विविध केस करवाये गए। इसके बावजूद प्रशासक प्रफुल पटेल के समक्ष उमेश पटेल अभी भी डटे हुए है। उमेश पटेल के इस अडिगता की वजह से उन्हें सरकारी कार्यक्रमों की बैठक और कार्यक्रमों के दौरान नजर कैद किया जाता है या उन्हें प्रवेश नहीं दिया जाता है। उमेश पटेल के आंदोलन से प्रशासन भी खौफ खाता है। उमेश पटेल एक सामाजिक क्रांतिकारी समाज सेवक है। उन्होंने समाज के विभिन्न क्षेत्रों में अपना योगदान दिया है। उन्होंने आज तक 22 रक्तदान शिविर करवाये हैं। जिनमें से 18 बार उन्होंने खुद रक्त देकर लोगों को प्रोत्साहित किया। उन्होंने महिलाओं के 100 स्व सहायता समूह बनवाये। 60 NGO का गठन करके युवाओं को समाज की मुख्य धारा में आगे बढने का हौसला प्रदान किया। उन्होंने 1000 से ज्यादा स्वास्थ्य के फ्री चेकअप कैंप करवाये। उन्होंने 1000 HIV / AIDS जागरूकता कार्यक्रम करवाये। उन्होंने महिला सशक्तिकरण के तहत 300 से ज्यादा ट्रैनिंग कैम्प का आयोजन किया। जिसका लाभ 7500 महिलायें उठा रही है। उन्होंने बाम्बू क्राफ्ट, एम्ब्रोइडरी, पैचवर्क, ज्वैलरी क्राफ्ट, सिलाई कैम्प महिलाओं के लिए चलाये।

उमेश पटेल के स्कूल से गरीब तबके के बच्चे अच्छी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। आज उमेश पटेल विविध पदों पर रहकर समाज की बेहतर सेवा कर रहे है। वे अपने कोली पटेल समाज में फैले कुरिवाजो को समाप्त करने हेतू पिछले 15 वर्षो से समाज के उप प्रमुख एवं समाज सुधारक समिति के अध्यक्ष बनकर सेवा दे रहे हैं। हर साल वे कोली पटेल समाज का समूह विवाह का आयोजन कराते है और समाज को नई दिशा की ओर बढ़ा रहे हैं। इसके अलावा उमेश पटेल स्वामी विवेकानंद युवक मंडल के अध्य़क्ष, दमण-दीव की आवाज बन चुकी यूथ एक्शन फोर्स के अध्यक्ष, दमण की बहुसंख्यक कोली पटेल समाज के उपाध्यक्ष, कोली पटेल समाज के समाज सुधारक समिति के अध्यक्ष, स्वामी विवेकानंद स्कूल के चेयरमैन, वीर शहीद भगतसिंह स्पोर्टस क्लब के चैयरमैन और मीडिया से जुड़कर वे समाज की सेवा कर रहे हैं। उमेश पटेल पिछले 20 सालो से दमण-दीव की विभिन्न समस्याओं पर आंदोलन करते आ रहे हैं। उन्होंने हर बार शक्तिशाली प्रशासन और शक्तिशाली नेताओं के प्रजा विरोधी कार्यों के खिलाफ जोरदार विरोध किया है। जिसके चलते उन्हें शक्तिशाली प्रशासन और शक्तिशाली नेताओं की दुश्मनी का भी सामना करना पडा है। इन आंदोलनों की वजह से उन्हें आर्थिक, मानसिक और शारिरीक तकलीफों का सामना करना पडा है। वर्ष 2004-05 में विद्युत विभाग के निगमीकरण के दौरान उन पर जानलेवा हमला हुआ था। वर्ष 2009-10 में फिर से उन पर जानलेवा हमला हुआ। जिसमें उनकी जान जाते जाते बची। इस हादसे में वे मौत के मुंह से वापस लौटे। वर्ष 2015-16 में फिर से विरोधियों ने उन पर हमला कर डराने की कोशिश की। इसके बावजूद उमेश पटेल प्रजा हित में लड़ते रहे। उनके आंदोलन को रोकने के लिए प्रशासन ने उन पर कई झूठे मुकदमे चला रखे है। इस आंदोलन के चलते उन्हें जेल भी जाना पडा। इसके बावजूद उमेश पटेल बडी बहादुरी के साथ अपने आंदोलन के साथ डटे रहे और आज भी दमण-दीव को बचाने और उसके विकास के लिए वे अडिग है। उनका कहना है कि जब तक शरीर में सांस रहेगी तब मैं इसी तरह अन्याय के खिलाफ लड़ता रहूंगा... लड़ता रहूंगा...

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